कौवा-बगुला संबाद : आगामी भागन कै भूमिका



छबी-स्रोत : गूगल बाबा



राम राम भईया !


कभौ गद्य औ कभौ पद्य, साहित्य मा दुइनौ कै उपस्थिति हुवत है| वैसे तो संसकीरत मा पूरे साहित्य का काब्य कहा गा है | मुला आज के समय मा काब्य अउर गद्य मा विधागत अंतर साफ़ देखात है| मोर इरादा तौ इहै है कि दुइनौ विधन से आपन बात रखी| गद्य मा आपन बात रखै खातिर “कौवा-बगुला संबाद” कै माध्यम चुनेन है|
कौवा अउर बगुला जाने केतरा समय से इंसानी कहानिन मा आवत अहैं| विद्यार्थी के लिए जरूरी पाँचों लच्छन मंहसे दुई ठौरे यनही दुइनौ जीवन से खींचा गा अहै–” काक-चेष्टा वकों-ध्यानं” | कौवा केरी चेस्टा अउर बगुला केरा ध्यान | मोर जोजना तौ इहै है कि इन दुइनौ कै चेस्टा अउर ध्यान कै सहारा लइके व्यंगात्मक लहजे मा समय-समाज पै आपन बात रखी |

प्रस्तुति कइव अंकन मा रहे | हर अंक कै सीर्सक अंकन के साथ रहे | पहिल अंक के तौर पै दुइनौ कै जान-पहचान अउर मुलाकात होये | दुइनौ हंसी-खुसी मिलिहैं अउर आगे कै मुलाकात तय कैके बिछुरि जइहैं | यहितरह संतों ! आगामी भाग मा आप लोग देखिहैं दुइनौ कै मुलाकात ——
ई तौ है हमार जोजना, अब आप लोगन कै राय कै इंतज़ार है ……

अब अगिले अत्त्वार तक ..
राम राम …!!!

10 thoughts on “कौवा-बगुला संबाद : आगामी भागन कै भूमिका

  • November 1, 2009 at 5:34 pm
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    भैया हम त बस एकै पक्षी संवाद जानिथ और ऊ है काकभुशुण्डी गरुण संवाद मुला कुआ और बगुला का ब्लागिरी संवाद भी देखि लिहा जाए !

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  • November 1, 2009 at 8:24 pm
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    भैज्जा , आजकल्ल जेई वारे सम्बाद चलत हैं
    पोष्ट नौनी लगी.इत्तो अच्छो मत लिखौ भैज्जा कै
    दूसरे ब्लागरन की पोस्ट पे टिपियाबे खौं टैम न मिलै
    {बुन्देली में टिप्पणी है }

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  • November 5, 2009 at 6:36 am
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    बहुतै प्यारी भाषा माँ आप लिखे हैं बहुतै अच्छा…..

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  • November 6, 2009 at 11:15 am
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    बहुत अच्छा परयास करत हौ भइया। जारी रखै कै भरसक प्रयत्न करेव।

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  • January 14, 2010 at 12:44 am
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    लईका रही तो सभे कहत रहलन….काक चेष्टा बको ध्यानम..सफल होवे के मूल मन्त्र होवी…..
    नीक लागल ईहो संवाद..

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