अवधी लोकगीत-१ : बालम मोर गदेलवा..(कंठ : डा. मनोज मिश्र)

ई अवधी गीत ‘बालम मोर गदेलवा’ वहि नारी कै बाति रखत है जेहिकै बियाह गदेला से होइ गा है, यानी वहिकी उमिर से बहुतै कम, कहौ तौ नान्ह लरिका से होइ गा है। ऊ लरिका सग्यान नाय होइ पावा है, घर दुवार वाले वहिका बेहि के नारी लै आये। अब बालम गदेलवा है तौ नारी का तरसै क परत अहै। अइसनै कुछ बाति यक अउर गीत ‘सैंयाँ मिले लरिकैंयाँ’ मा कही गै है। हम गीत का लिखि दियत अहन हियाँ, यहिसे सब अरथ जाहिर होइ जये फिर आप सुनि के आनंद लीन जाय गीत कै! ( यहि गीत का आप मू्ल रूप मा मनोज जी की पोस्ट ‘बालम मोर गदेलवा’ मा देखि सकत हैं, हमरे यहि पोस्ट कै प्रेरना ह्वईं से है। )

अवधी गीत : बालम मोर गदेलवा..

तरसे जियरा मोर-बालम मोर गदेलवा

कहवाँ बोले कोयलिया हो ,कहवाँ बोले मोर 

कहवाँ बोले पपीहरा ,कहवाँ पिया मोर ,

बालम मोर गदेलवा…..

अमवाँ बोले कोयलिया हो , बनवा बोले मोर ,

नदी किनारे पपीहरा ,सेजिया पिया मोर 

बालम मोर गदेलवा…..

कहवाँ कुआँ खनैबे हो ,केथुआ लागी डोर ,

कैसेक पनिया भरबय,देखबय पिया मोर ,

बालम मोर गदेलवा…..

आँगन कुआँ खनाईब हो रेशम लागी डोर ,

झमक के पनिया भरबय, देखबय पिया मोर ,

बालम मोर गदेलवा….

कंठ : यहि बिलुप्त हुअत गीत का आपन कंठ दैके मनोज मिसिर जी लोक-तत्व के संरछन के लिहाज से सराहनीय काम किहिन हैं। मनोज जी कबि सरल जी के गीत ‘मन कै अँधेरिया’ का आपन कंठ दै चुका हैं। अब यहि गीत कै यू-टुबही प्रस्तुति आपके सामने है, आप लोग आनंद उठावैं:

[youtube http://www.youtube.com/watch?v=1YfM3ZNB0nM&w=420&h=345]

~सादर/अमरेन्द्र अवधिया 

8 thoughts on “अवधी लोकगीत-१ : बालम मोर गदेलवा..(कंठ : डा. मनोज मिश्र)

  • September 10, 2011 at 11:43 am
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    सिंगार रस ते भरी सरल कै कबिता अउ डॉ. मनोज का गला सोने पै सुहागा होइ गा.
    अवधी के लिए आपका जूनून काबिलेतारीफ़ है !
    बहुते अभार !

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    • September 10, 2011 at 2:06 pm
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      पसंद करै खातिर सुक्रिया साहब, मुला ई गीत सरल जी कै लिखा न आय, पारंपरिक आय 🙂

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  • September 10, 2011 at 12:07 pm
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    एके त सुनि सुनि के घिसि डाले हई! 🙂

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  • September 11, 2011 at 8:07 am
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    अरे संतोस भैया जी, होइ जात है , जब मनई ज्यादा ब्यस्त रहत है तौ, यहिरी आप बिजी ढेर अहैं न! 🙂

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  • Pingback: बाज रही पैजनिया.. (कंठ : डा. मनोज मिश्र) « अवधी कै अरघान

  • October 20, 2011 at 10:20 pm
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    पढ़ीलिखीहमरे खियाल से ई बेलवरिया तर्ज़ के गीत अहै…. हम गीत सुनि नाहीं पाय रहे हैं मुला पढ़ी के लगत अहै कि ई बेलवरिया तर्ज़ होई… एक नमूना दो लाइन में बेलवरिया के-

    अरे ससुरे ना जाब… खाई जहर मरि जाबै…
    नईहर माँ बोकरी चरौबय…. सब लौंडन से मउज उड़ौबय …
    अरे हाँ ससुरे ना जाब… खाइ जहर मरि जाबै

    … जय होय अमरेंदर भैया के

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